Saturday, December 6, 2008

Modern day dilemma...

Put humanity on dick …. Ok …. Asshole जब वोह यहाँ आके मारते हैबच्चो को वोह humanity है
भेन्चोद घर में घुस कर मारों ..जो मिले उसे मारोऔरनामो निशान मिटा दो
सालो कोहिन्दी इंग्लिश या उर्दू कुछ समझ नही आतीभेन्चोद गांड में गोली उतारोगे तभी
दिमाग मई बात बैठेगीइनकी आने वाली नस्लों मे कि …. हरामियों कभी इंडिया साईं पंगा लिया नै
तोह माँ ही नही …..तुम्हारी ख़ुद कि गांड भी चुदगी
humanity …

शांत गधाधारी भीम शांत ... यही कहेंगे ना युधिस्तर ? एका एक यही दिमाग में आया ऊपर लिखा जवाब पढ़के | आज कल के परिस्थितियों में यह सीन जरुर फिट बैठेता है द्रौपदी का चीड हरद और पांडवो कि ना कुछ कर सकनेकि विडम्बना| युधिस्तर भीम को शांत करते रह गए, अर्जुन अपने आप को शर्म से छुपाते रह गए, भीम फ़िर भीअपने बड़े भाई के ख़िलाफ़ जाने से कतराते रह गए ... सोचा तोह यह सूरत अभी अपने देश कि जनता (भीम) , देशके प्रधानमन्त्री (युधिस्तर) और देश के अर्जुन (शायद पुलिस कर्मी और जवान ) कि भी है कौन जानता है सहीक्या है (युधिस्टर कि
आग्यापाराता या भीम का गुस्सा) ? कौन जानता है ग़लत क्या है (लड़ाई या समझोता)? कौनजानता है कौन संभालेगा इस देश को ? कौन जानता है अपने कृष्ण कहाँ है ? सही रास्ता किस ओर है ? इस्राइलीताकत (या बैमानी करतूतें) अभी तक अपने तरीके से पलिस्तीं को समझा तोह सकी नही ... तोह अभी भारत क्याकर सकेगी एका एक अपनी शान्ति और सहयोग प्रति नीति से हटकर ... नही भाई में शायद बिल्कुल ही नहीजानता कि क्या करना है ... ना में आपके सवालों का जवाब दे पाऊंगा ...
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